.::.यह वेब साईट upbed 2010 के उच्च रैंक वाले उन छात्रों के लिए है जिनका नामांकन कन्फर्मेसन लेटर के अभाव में रद्द कर दिया गया था .इस वेब साईट के माध्यम से हम पीड़ित छात्रों को सही सूचनाएं उपलब्ध कराएँगे .कृपया पीड़ित छात्र अपना मोबाईल नंबर ,नाम,महाविद्यालय का नाम,रैंक और रिट नंबर bedtopper@gmail.com पर मेल करें . ..::.

Wednesday, 11 May 2011

महत्वपूर्ण नयी रणनीति


जो छात्र  लखनऊ खंडपीठ की एकल बेंच के निर्णय के खिलाफ डबल बेंच में अपील करने जा रहे हैं या कर चुके हैं वह कृपया श्री वी.के.सिंह  (आपकी पुत्री का भी मामला एकल बेंच में खारिज हो गया है )से मोबाइल नंबर ******* पर संपर्क करें .
कृपया  अपने अधिवक्ता महोदय को निम्न बिन्दुओं से अवगत कराएँ (या इस लेख के इस हिस्से की एक प्रति प्रिंट करा के उन्हें दे दें ------
(१) हमने लखनऊ विश्विद्यालय को 5000 रुपये का बैंक ड्राफ्ट बतौर सम्पूर्ण  अग्रिम फीस दिया था .इसके साथ ही हमने  लखनऊ विश्विद्यालय के साथ हुई   संविदा (contract)  की  शर्तें पूर्ण कर दीं .बैंक /डिमांड  
ड्राफ्ट एक ऐसा नेगोसिएबल   इंस्ट्रूमेंट    है  जो कि बाउंस नहीं होता है .अतः हमारे ऊपर एक पैसा भी बकाया नहीं था .अतः हमारे ओर से संविदा को नहीं तोडा गया . लखनऊ विश्विद्यालय ही  5000 रुपये सम्पूर्ण  अग्रिम फीस लेने के बाद हमारा नामांकन निरस्त कराकर संविदा (contract)  को तोड़ रहा है.
(२)today itself  की परिभाषा या समय सीमा पूछें .  हमारे एलोटमेंट लेटर में " today itself "  शब्दों का प्रयोग कन्फर्मेसन लेटर के लिए हुआ है ,अर्थात  एलोटमेंट लेटर वाले दिन ही कन्फर्मेसन लेटर वितरित होने थे .परन्तु जिन अभ्यर्थियों की काउंसलिंग 03-08-2010 को हुई थी उनमे से जिन छात्रों को कन्फर्मेसन लेटर  दिया गया उसपर 06/08/2010 की तारीख अंकित है,नियमतः उन्हें 04 -08-2010  को ही कन्फर्मेसन लेटर मिल जाना चाहिए था ,परन्तु उन्हें 06/08/2010 को दिया गया.इसकी सूचना अन्य छात्रों को नहीं दी गयी.यदि  लखनऊ विश्विद्यालय के अधिवक्ता कहते हैं की इसकी सूचना दी गयी थी तो हमारे अधिवक्ता महोदय को पूछना  चाहिए कि किस समाचार पत्र में अथवा किस माध्यम से.2519 सामान्य रैंक का कन्फर्मेसन लेटर उपलब्ध है ,इसे कोरियर द्वारा हमारे अधिवक्ताओं को भेजा जा रहा है.
(३) लखनऊ विश्विद्यालय के अधिवक्ता महोदय हमे लापरवाह बताने का प्रयास करेंगे(जैसा की  सचिन अरोरा मामले के निर्णय में कहा गया है ) ,परन्तु हमारे अधिवक्ता महोदय को  कहना होगा कि सबसे बड़ा लापरवाह लखनऊ विश्विद्यालय है ,जिसने  National Council For Teacher Education   के दिशा निर्देशों की अवहेलना करते हुए अपने सूचना विवरणिका में नामांकन हेतु वांछनीय  योग्यता B.A./B.Sc./B.Com 45% अंको सहित छापा जबकि ncte के दिशा निर्देशों के अनुसार B.Ed. कोर्स में  नामांकन के  लिए ५०% अंको के साथ B.A./B.Sc./B.Com आवश्यक था  . ५०% से कम अंको वाले लगभग 2.5 lakh अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी ,पर उनका परीक्षा परिणाम (माननीय   उच्च न्यायलय इलाहाबाद  के निर्णय के  अनुसार ) घोषित नहीं किया गया ना ही उनकी परीक्षा फीस वापस की गयी .दूसरी लापरवाही  प्रवेश परीक्षा 
प्रथम 

की 

तिथि  से एक दिन पहले प्रश्न पत्र  लीक हो जाना ,यद्यपि  ये जांच का विषय है कि लापरवाही कहाँ से और किस स्तर से  हुई  . 


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